समाज के सम्पूर्ण विकास को, तभी सशक्त कर पायेंगे। जब हम सम्पूर्ण विकास को, सम्पूर्णत समाज के सम्पूर्ण विकास को, तभी सशक्त कर पायेंगे। जब हम सम्पूर्ण विकास को, ...
नीयत बदलती, इंसानियत नहीं। नीयत बदलती, इंसानियत नहीं।
साहित्य समाज का दर्पण है, इतिहास अतीत का उसमें अर्पण हैI साहित्य समाज का दर्पण है, इतिहास अतीत का उसमें अर्पण हैI
विनती मेरी स्वीकार करो, बस इतना सा उपकार करो ॥ विनती मेरी स्वीकार करो, बस इतना सा उपकार करो ॥
जो चाहे जीना सुकून से तो मोहब्बत मत करना जिसे जीना हो मर मर के तो तुम बेशक मोहब्बत से खुद को ... जो चाहे जीना सुकून से तो मोहब्बत मत करना जिसे जीना हो मर मर के तो तुम बेश...
सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता बन कर चुकाना होगा हमें भी ऋण। सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता बन कर चुकाना होगा हमें भी ऋण।